रक्षाबंधन पर भाई ने  गिफ्ट मे दिया लंड

Rakhi par didi ki chudai kahani:- हैलो दोस्तों, मेरा नाम राजू है । आज मैं एक नई कहानी लाया हूँ। ये मेरे एक फ्रेंड विजय और उसकी बहन शिखा की है। अब स्टार्ट करते हैं—

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विजय की फैमिली में 4 लोग हैं—उसकी मम्मी, पापा, विजय (उम्र 21), अंजलि उसकी बहन (उम्र 22)। उनके घर में सभी फ्रेंड्स जैसे रहते हैं। विजय और अंजलि भी अच्छे फ्रेंड्स हैं।

बात एक साल पहले की है। अगस्त का महीना था। विजय और अंजलि दोनों की अच्छी बनती थी। दोनों को एक-दूसरे से बहुत प्यार था, केयर भी करते थे एक-दूसरे की, और सीक्रेट भी शेयर करते थे। एक दिन की बात है, विजय ऐसे ही बैठा था।

तभी वो अपनी दी का फोन की हिस्ट्री चेक करता है। तो उसको उसमें बहुत सारे पॉर्न मिलते हैं। तभी उसको अपनी बहन के बारे में पता चलता है कि वो भी सेक्स के बारे में सोचती थी।

ये देखकर विजय के मन में बहुत कुछ आने लगा। अब उसको जब भी मौका मिलता वो अपनी दी का फोन चेक करने लग गया। उसको हर बार हिस्ट्री में पॉर्न मिलते थे। ऐसे ही थोड़े दिन निकल गए। आप ये कहानी antarvasna4u.com पर पढ़ रहे है 

एक दिन वो अपनी दी के रूम के बाहर होता है। तब वो डोर के कीहोल से अंदर देखने का ट्राई करता है। वो अंदर देखकर हैरान हो जाता है। उसकी अंजलि बेड पर कपड़े उतारकर चूत में उँगली कर रही थीं, और फोन में पॉर्न देख रही थीं। उनको ऐसी हालत में देखकर विजय का लंड खड़ा होने लग जाता है।

थोड़ी देर देखने के बाद वो वहाँ से चला जाता है। उसके मन में बहुत अलग से खयाल आने लगते हैं। उस दिन से वो अपनी बहन को एक अलग नजर से देखने लगता है। फिर दी से बोलता है—

विजय: दी, क्या कर रही हो?

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अंजलि: कुछ नहीं।

विजय: क्या बात है, आज-कल बात नहीं करती मुझसे, ना ही टाइम देती हो? कोई बॉयफ्रेंड बन गया क्या?

अंजलि: नहीं यार, पढ़ाई के चक्कर में टाइम नहीं मिलता। और मेरी ऐसी किस्मत कहाँ कि बॉयफ्रेंड बनाऊँ। ऐसा कुछ भी होगा तो सबसे पहले तुझे ही बताऊँगी।

विजय (मन में): हाँ दी, जानता हूँ नहीं है कोई बॉयफ्रेंड। तभी तो ऐसे चूत में फिंगरिंग करती हो।

फिर विजय अंजलि को हग करता है। लेकिन आज हग थोड़ा अलग था, और ज्यादा ही टाइट था। अंजलि को भी फील होता है। फिर वो बोलती हैं— आप ये कहानी antarvasna4u.com पर पढ़ रहे है 

अंजलि: क्या बात है विजय, आज दी पे ज्यादा ही प्यार आ रहा है। कुछ चाहिए क्या?

विजय: अरे नहीं दी, आप मुझसे कुछ नहीं छुपाती, सब कुछ शेयर करती हो। ये मुझे बहुत अच्छा लगता है। आपको कुछ भी चाहिए हो ना तो मुझसे बोल देना। मैं आपके लिए कुछ भी कर सकता हूँ।

अंजलि: ठीक है, बता दूँगी मैं।

फिर 3 दिन बाद अंजलि रूम लॉक करके फिंगरिंग कर रही होती हैं। तभी विजय भी उनको की होल में से देखता है और ध्यान से सुनता है। तब उसे दी की आवाज आती है—

अंजलि (पॉर्न देखके फिंगरिंग करती हुई): मैं ना अब ये फिंगरिंग करते हुए थक गई हूँ। मुझे भी अब लंड लेना है। मैंने बहुत ट्राई किया कि कोई अच्छा बॉयफ्रेंड मिल जाए। लेकिन कोई मिल ही नहीं रहा। और इसलिए अब ना मैं बॉयफ्रेंड नहीं ढूँढूँगी। अब मैं सिर्फ लंड ढूँढूँगी। अब मुझे कैसे भी करके किसी का भी लंड चाहिए।

विजय (डोर के बाहर से): ये अंजलि क्या बोल रही हैं? वो सेक्स के लिए किसी का भी लंड ले लेंगी। अगर किसी गलत से कर लिया तो वो तो इनको ब्लैकमेल भी कर सकता है। और परेशान भी करेगा।

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फिर विजय वहाँ से चला जाता है। अब विजय के मन में यही सब चल रहा होता है, कि दी कितनी हॉट हैं, और उनको देखने का मन कर रहा था। दूसरी तरफ दी की चिंता भी होती है कि कहीं दी सेक्स के लिए कोई गलत कदम या इंसान ना चुन लें।

बहुत देर सोचने के बाद विजय डिसाइड करता है कि वो दी को बहुत प्यार करता था। उनकी केयर भी करता था। उनके साथ कुछ गलत नहीं होने देना चाहता था, और उनके लिए कुछ भी कर सकता था। आप ये कहानी antarvasna4u.com पर पढ़ रहे है 

विजय (मन में): जब मैं दी के लिए सब कर सकता हूँ, तो दी की लंड की जरूरत भी पूरी कर सकता हूँ।

तब वो फाइनली दी के साथ सेक्स करने का मन बना लेता है। फिर वो दी के फोन में भाई-बहन की सेक्स वीडियोज और स्टोरीज की नोटिफिकेशन ऑन कर देता है। फिर अगले दिन देखता है तब उसको पता चलता है कि दी ने उन सभी साइट्स पे जाकर स्टोरीज और वीडियोज देखी थीं। थोड़ी देर बाद दी उसके पास आती हैं और बोलती हैं—

अंजलि: विजय, 2 दिन के बाद रक्षाबंधन है। इस बार मुझे क्या गिफ्ट दोगे? मुझे बहुत अच्छा गिफ्ट चाहिए।

विजय: दी इस बार मैं आपको बहुत अच्छा गिफ्ट दूँगा, जो किसी ने कभी नहीं दिया होगा। इसको देखकर आप बहुत खुश हो जाओगी।

अंजलि: अच्छा, ऐसा क्या देगा तू मुझे, जो किसी ने नहीं दिया होगा?

विजय: दी वो तो सरप्राइज है, और मैं ये गिफ्ट आपको अकेले में दूँगा, जब मम्मी-पापा बुआ के यहाँ जाएँगे तब।

अंजलि: ठीक है।

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फिर ऐसे ही 2 दिन तक विजय दी को फिंगरिंग करते देखता है, और देखकर मुठ मारता है। साथ में दी की हिस्ट्री भी चेक करता है। फिर आता है दिन रक्षाबंधन का, और दोनों राखी बाँधते हैं। फिर मम्मी-पापा भी बुआ के यहाँ पे चले जाते हैं। तब दी विजय से बोलती हैं—

अंजलि: विजय, अब तो मम्मी-पापा भी गए। अब तो मेरा गिफ्ट दे दो।

विजय: दी ठीक है, आप रूम से बाहर जाओ। मैं गिफ्ट रेडी करके बुलाता हूँ।

फिर विजय एक बॉक्स लेता है, जो उसने पहले से रेडी रखा था। वो बॉक्स नीचे से ओपन था। फिर वो अपना लंड बाहर निकालता है, और उसके ऊपर बॉक्स रख लेता है। उसके बाद वो दी को आवाज देके बुलाता है—

अंजलि: विजय अब बताओ कहाँ है मेरा गिफ्ट। मुझे पसंद आना चाहिए, वरना तू गया।

विजय: हाँ दी, आपको गिफ्ट जरूर पसंद आएगा। लेकिन उसके लिए आपको अपनी आँखें बंद करके बॉक्स के अंदर हाथ डालना होगा।

फिर अंजलि आँखें बंद करके बॉक्स के अंदर हाथ डालती हैं।

अंजलि: क्या है ये, सॉफ्ट-सॉफ्ट लग रहा है? आप ये कहानी antarvasna4u.com पर पढ़ रहे है 

फिर दी ने और अंदर हाथ डाला। जैसे ही लगा वो लंड है, उन्होंने हाथ हटाकर देखा कि क्या है। लंड देखकर वो बोलती हैं—

अंजलि: विजय ये क्या है? गिफ्ट की जगह ये क्या है?

विजय: ये ही तो है आपका गिफ्ट, जिसकी आपको जरूरत थी और चाहिए था। मैंने देखा है आपको फिंगरिंग करते हुए। ये बोलते हुए भी देखा है कि अब आप किसी का भी लंड लेने को रेडी हैं। और बाहर लंड लेने में रिस्क है, इसलिए आप अपने प्यारे भाई का लंड ले लो।

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ये सब बोलते टाइम विजय बॉक्स को हटाकर अंजलि को अच्छे से लंड दिखाता है, और साथ में उनका हाथ भी लंड पे रख देता है। अंजलि लंड पे से हाथ हटाने की कोशिश करती हैं, लेकिन कुछ नहीं कर पातीं।

अंजलि: ये क्या बोल रहा है तू विजय? तू मुझे फिंगरिंग करते हुए देखता था? हाँ मैंने ऐसा बोला भी था कि मुझे लंड चाहिए। लेकिन तू मेरा भाई है। ऐसा नहीं कर सकती मैं।

विजय: दी लंड तो लंड होता है चाहे किसी का भी हो। वैसे भी मैं ये भी जानता हूँ आप कुछ दिनों से भाई-बहन की सेक्स वीडियोज और स्टोरीज पढ़ रहे हो। उनमें भी आपने देखा कि ये कुछ गलत नहीं है, तो हम क्यों नहीं कर सकते? आप ये कहानी antarvasna4u.com पर पढ़ रहे है 

विजय: अगर आप बाहर किसी का लंड लोगी तो रिस्क है। वो कैसा हो, आपको ब्लैकमेल करे, आपको परेशान करे, और बदनामी का भी डर रहता है।

इतना बोलकर विजय दी को किस करने लग जाता है। लेकिन 2 मिनट बाद दी भी गरम हो जाती हैं, और वो अब छूटने की कोशिश बंद कर देती हैं। विजय ने भी अंजलि का हाथ छोड़ दिया था, और दी ने अभी भी लंड पकड़े रखा था। फिर विजय बोलता है—

विजय: प्लीज अंजलि मान जाओ ना। देखो आपकी और मेरी दोनों की जरूरत पूरी हो जाएगी, और किसी को पता भी नहीं चलेगा।

अंजलि: ठीक है, लेकिन किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए। ये सिर्फ तेरा और मेरा सीक्रेट होगा।

इतना बोलकर अंजलि विजय को किस करने लग जाती हैं, और विजय के लंड को हिलाने भी लग जाती हैं। विजय भी अब अंजलि को किस करता है, और उनके बूब्स दबाने लगता है, और साथ में उनके कपड़े निकालने लगता है। कुछ ही सेकंड्स में दोनों भाई-बहन पूरे नंगे हो जाते हैं।

अंजलि: विजय मुझे ये लंड बहुत टाइम से चाहिए था। आज ये मेरे हाथ में आया है, इसको मैं कभी नहीं छोड़ूँगी।

विजय: हाँ दी, कभी मत छोड़ना। ये भी आपसे दूर नहीं होना चाहता।

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फिर अंजलि विजय के लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगती हैं। विजय भी दी का मुँह पकड़के लंड घुसाने लगता है। फिर 5 मिनट बाद दोनों 69 की पोजीशन में आ जाते हैं। फिर अंजलि बोलती हैं— आप ये कहानी antarvasna4u.com पर पढ़ रहे है 

अंजलि: विजय अब और मत तड़पाओ, डाल दो इस लंड को मेरी चूत में।

फिर दी विजय को कंडोम पहनाती हैं। उसके बाद विजय दी की चूत में अपना लंड सेट करके डालता है। लंड थोड़ा ही अंदर जाता है, और दी की चीख निकल जाती है।

अंजलि: विजय बहुत दुख रहा है। फर्स्ट टाइम है ना, थोड़ा आराम से करो।

फिर विजय थोड़ी देर रुक जाता है, और दी को किस करता है, और बूब्स दबाता है। फिर वो दी के बूब्स चूसने लगता है। दी थोड़ा नॉर्मल होती हैं। तब वो फिर से लंड झटका देकर अंदर डालता है, और पूरा लंड अंदर घुसा देता है।

फिर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगता है। अंजलि को पहले थोड़ा दर्द होता है। लेकिन थोड़ी देर में मजा आने लगता है।

अंजलि: विजय आआह्ह्ह बहुत मजा आ रहा है आआह्ह्ह और तेज करो। आज इस चूत को पूरा मजा दो। चोद दो इसको पूरी तरह से आआह्ह्ह।

विजय भी दी के मोअन सुनकर जोश में आ जाता है। फिर वो अंजलि के बूब्स पकड़के और जोर से चोदने लगता है। पूरे रूम में उनकी चुदाई और मोअनिंग की आवाज गूंजती है।

फिर 15 मिनट की चुदाई के बाद दोनों का पानी आ जाता है। दोनों 69 की पोजीशन में आकर एक-दूसरे का पानी साफ कर देते हैं। थोड़ी देर वो रेस्ट करते हैं, और ऐसे ही नंगे ही एक-दूसरे से चिपककर सो जाते हैं।

फिर विजय अंजलि से पूछता है—

विजय: तो दी, कैसा लगा रक्षाबंधन का गिफ्ट? आप ये कहानी antarvasna4u.com पर पढ़ रहे है 

अंजलि: बहुत अच्छा। अब मुझे ये गिफ्ट हर रोज़ चाहिए।

विजय: हाँ दी, ये अब आपका ही है, जब भी चाहो ये गिफ्ट ले सकती हो।

अब उन दोनों का रिश्ता बदल गया था। मम्मी-पापा के आने से पहले उन दोनों ने 2 बार और चुदाई की। और अब जब भी मन होता है उनका दोनों मिलकर चुदाई करते हैं।

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