खेत में चुदाई का मज़ा लिया…

नमस्कार दोस्तों क्या हाल चाल है आइये मै आप सब एक कहानी बताता हु दिवाली के दिन थे और गाँव में मेला लगा हुआ था. मेरे लिए यह बड़ा सही मौका था मेरी शादीसुदा गर्लफ्रेंड सविता भाभी को चोदने का. सविता को चोदना मुझे बहुत अच्छा लगता था और सविता थी ही ऐसी की उसे देख कर चोदन का मन हो जाता था. सविता हमारे पडोसी रामलाल की बहु थी और उसका पति शुभम एक नंबर का चरसी और जुआरी था. सविता जब से यहाँ शादी कर के आई थी उसने शायद दुःख ही देखा था, लेकिन उसका टाका मेरे से भीड़ गया था और हम दोनों के नसीब की चुदाई हम लोगो को मिल रही थी. मैंने सुबह ही जब सविता भाभी हगने के लिए खेत में गई थी तो उसे सोनम के हाथ लेटर भेज के शाम को खेतों पार आये मेले में मिलने के लिए राजी कर लिया था. सोनम जवाब ले के आई थी की सविता भाभी आएंगी लेकिन मुझे उसने वही पिली शर्ट डाल के आने को बोला था जिसे पहन के मैं पहली बार उसके सामने आया था. वो मुस्कुरा रही थी दोस्तों.
सुनकर आपका लंड खड़ा हो जायेगा दोस्तों वैसे मुझे चुदाई का सुख सविता भाभी दे देती थी लेकिन आज का मौका कुछ अलग ही था क्यूंकि शुभम को शक हो जाने के वजह से पिछले एक महीने से चुदाई का प्रबंध नहीं हो पा रहा था और मुझे लंड हिलाते हिलाते अब गुस्सा आने लगा था. मैंने अपने दोस्त नरेश को पहले ही बोल दिया था की मैं सविता को लेके उसके गेहूं के खेत में आउँगा. नरेश ने मुझे हाँ कह दी थी. आज शाम भी साली शाम तक आई ही नहीं, मेरा लंड अभी से सविता की चूत की तलब लगाये बैठा था, अरे क्या रसीली चूत रखती थी…..! और सब से अच्छे तो उसके स्तन थे…यह बड़े बड़े और गोल गोल…मैंने कई बार इन स्तन के निपल के साथ लंड को रगड़ रगड़ के अपना वीर्य इन स्तन के उपर छिड़का था. शाम होते ही मैं अपनी पिली शर्ट और जेब में एक सरकारी दवाखाने से मिली कंडोम डाल के निकल पड़ा. सविता भाभी और शुभम के शारीरिक सबंध नहीं थे इसलिए वो माँ बन गई तो बाप की खोज होने का पूरा डर था, इसी कारण मेरे बच्चो को मैं हमेशा कंडोम में छुपा लेता था. मेरा लंड ताबड़तोड़ है और एक अच्छी चुत के तलाश में है.
उसकी चूची क्या गजब लग रही थी दोस्तों करीब 7 बजे होंगे और मैं सविता भाभी की आस देखता हुआ मेले के स्थल के प्रवेश के करीब ही खड़ा हुआ था. तभी मुझे दूर से सविता भाभी और उनकी सहेली सुनीता आते हुए दिखे. शायद अकेला आना मुश्किल था इसलिए सविता सुनीता को ले आई थी. सुनीता भी गाँव की गिनीचुनी रंडियों में से थी उसकी चूची का उभार गजब था दोस्तों एक थी, वह कितनी बार दोपहर को हगने के बहाने खेतों की गलियों में जाती थी और लंड ले कर तृप्त होती थी. सुनीता और सविता भाभी को मैंने दूर से ही इशारा किया और मैं मेले से निकल के दाहिनी तरफ आये नरेश के खेत की तरफ चल दिया. नरेश का खेत वही पास में था और एक मिनिट में तो मैं वहाँ पहुँच गया. मैंने देखा की नरेश ने अपने नौकर कालू को भी भगा दिया है, ताकि मैं आराम से सविता भाभी को चोद सकूँ. मैंने मुड के देखा और यह दोनो उधर ही आ रही थी. सविता की चूत को मारने के ख्याल से ही मेरा लंड तना हुआ था, मैंने घर से निकलते वक्त ही वायेग्रा की गोली ले ली थी उसका असर अब दिखने लगा था क्यूंकि धोती के किनारे से मेरा 8 इंच का लंड कड़क खड़ा हो चूका था. उसकी बूब्स क्या मन को मचला रहे थे दोस्तों.
मन कर रहा था उसकी चूची पकड़ कर पी जाऊ दोस्तों दोनों जैसे ही आई मैंने सविता को इशारा किया और हम दोनों पशुओ के खाने के लिए रखे घास के ढेर की तरफ चल दिए. वहाँ जाते ही मैंने अपनी धोती और पिली कमीज उतार दी. सविता के ब्लाउज और उसकी साडी भी खुल चुकी थी, बेचारी गरीब थी इसलिए ब्रा-पेंटी तो इसके किस्मत में थी ही नहीं. मेरा खड़ा लंड देख के सविता भी उतावली हो चुकी थी और उसने मुझे वही घास के पुलों के ढेर पर फेंका. मेरा लंड सविता के हाथ में इधर उधर होने लगा और फिर लंड को मस्त सांत्वना मिली जब सविता ने उसे मुहं में भर लिया, मैंने सविता से कहा…”भाभी बहुत दिन के बाद आई हो आज हाथ में, जरा देर तक करेंगे….!”उसकी चूची क्या मुलायम थी दोस्तों.
उसकी चूची क्या कड़क थी दोस्तों तभी ढेर के दुसरे तरफ से हसने की आवाज आई, हम दोनों ने देखा की सुनीता वहाँ छुप कर हमें देख रही थी…वह खड़ी हुई और जाने लगी, मैंने आवाज दी….”आ जाओ अब देख लो…कलाकार तो तुमने देख ही लिए है, ड्रामा भी देख के ही जाओ!” उसकी चूची पीते पीते तनकर लाल हो गयी.
उसकी चुत का टेस्ट नमकीन और मादक था दोस्तों बस चाटा जाओ सविता हंस पड़ी और उसने भी सुनीता को इशारा किया आने के लिए, सविता अपने होंठ मेरे कान के पास लाइ और बोली, “कन्हैया..तूम इसे भी साथ में क्यों चोद नहीं देते…वैसे भी तुम्हारा लंड मुझे बहुत पेलता है…चलो आज तीनो मिल के चुदाई कर लेते है.”उसकी बूर मदमस्त हो गयी दोस्तों उह उह उह उह..
दोस्तों मैंने ऐसी तरह न जाने कितने औरतो और लड़कियों बूर में चोदा पेली किया है मैंने सुनीता की तरफ एक नजर उठा के देखा, उसकी गांड और स्तन किसी भेंस के बावले जितने बड़े थे और उसने शायद अभी तक इतने लंड ले और क्या बताऊ दोस्तों मैंने बहुत सी कमसीन जवान और मदमस्त लड़कियों की बूर में चुदाई किया है काफी मजा लिए थे की उसकी चूत अब भोसड़ी बन चुकी थी. मैंने सोचा चलो ऐसे भी वायेग्रा खाई हुई है…इसकी चूत को भी सुख दे देता हूँ. सुनीता जैसे आई सविता भाभी ने उसे कुछ इशारा किया और वह सीध्र ही अपने कपडे उतारने लगी, शायद यह दोनों रंडियां मेरे लंड को भोगने का प्लानिंग कर के आई थी. मैंने भी इन दोनों चुतो को लंड से फाड़ देने का इरादा बना लिया. एक बार फिर से मेरा लंड सविता के मुहं में चला गया और सुनीता अपने कपडे पुरे उतार के मेरे पास लेट गई. सूखे घास की ढेर में हम तीनो एक देसी थ्रीसम की तरफ बढ़ने लगे थे. मैंने संगीता के चुंचे रगड़ने चालू कर दिए और उसकी छाती और कंधे पर किस करी. सविता इधर लंड को गले तक घुसा घुसा के चूस रही थी और उसके मुहं से ग्गग्ग्ग ग्गग्ग्ग ग्गग्ग्ग ऐसी आवजे निकल रही थी. तभी सुनीता भी उठ खड़ी हुई और वह भी लंड के पास जा पहुंची, उसने सविता से लंड अपने हाथ में लिया और लंड ने भाभी बदल दी. मेरा लंड बारी बारी दोनों चूसने लगी और कभी कभी तो लंड को दोनों एक साथ दो तरफ से चूस रही थी. मै एक चुदकड़ लड़की हु दोस्तों मुझे हमेशा चुदाई भूख रहती दोस्तों.
मुझे चुदाई के बारे सोचकर मै मदहोश हो जाती हु मेरे लंड पर थूंक की जैसे के नदी बह रही थी लेकिन वाएग्रा असरदार साबित हुई थी वरना इतनी चूसन के अंदर तो गधे का लंड भी वीर्य छोड़ देता. सविता मेरी तरफ लालच भरी नजर से देखने लगी और मैं समझ गया उसे चूत की सर्विस करवानी है. मैंने अपनी शर्ट की जेब से कंडोम निकाला और उसे पहनने वाला था की सुनीता वहाँ आ गई और उसने लंड के अग्रभाग को और जोर से एक मिनिट चूसा. लंड पूरा लाल लाल हो चूका था लेकिन वह अडग खड़ा हुआ था. मैंने कंडोम डाला और सविता भाभी को वही टाँगे खोल के लिटा दिया. सविता की देसी चूत के अन्दर मैंने एक ही झटके के अंदर लंड पेल दिया और उसकी आह आह आह उह ओह खुले खेत में गूंजने लगी. सुनीता हमारे सामने बैठी थी और उसकी दो उंगलियाँ चूत के अंदर थी. वह उन्हें बहार निकाल कर मुहं में डालती थी और वापस चूत के अंदर करती थी.मेरा लंड झटके दे दे कर सविता को पेले जा रहा था. सुनीता ने मुझे आँख मार दी और मैं समझ गया की वह भी लंड की प्रतीक्षा में है. मैंने सविता की चूत में अब एक्स्प्रेक्स की झड़प से लंड अन्दर बहार करना चालू कर दिया और उसके सिस्कारे अब हलकी हलकी चीखों में तबदील होने लगे थे वह चीख रही था….ओह ओह आ मम्मी…मर गई…कन्हैया धीरे करो..आह आह आह…ओह मम्मी….!मेरी चुत हमेशा लैंड की प्यासी रहती है दोस्तों.
मैं साथियो मुझे हमेशा मोटे लंड की जरूरत रहती है उसकी दो मिनिट और चुदाई की थी और सविता भाभी की चूत का तेल निकल गया. सुनीता अब वहाँ कुतिया बन के उलटी लेट गई और मैंने हल्के से लंड सविता की चूत से निकाल के सुनीता की चूत में भर दिया. सुनीता की चूत सही में पूरी ढीली थी और डौगी में चोदने की वजह से लंड पूरा अंदर तक जा रहा था. मैंने हाथ आगे कर के उसके दोनों स्तन पकड लिए और उसे जोर जोर से लंड अन्दर बाहर करने लगा. सुनीता दोस्तों मोटे लैंड से चुदाई करने का मजा कुछ और है की चूत ढीली जरुर थी लेकिन शायद उसे भी इतने लम्बे लंड का सुख नहीं मिला था तभी तो वो भी…कन्हैया.. कन्हैया अहह आह्ह ओह ऐसी आवाजे निकाल रही थी….मेरा लंड अभी भी लोहे के जैसा कडक था. अब तक वह दो भाभी की चूत का तेल निकाल चूका था. सविता की गांड में लंड दिए काफी वक्त हुआ था, यह सोच के मैंने लंड के उपर से कंडोम हटाया और सविता की तरफ गया..सविता समझ गयी क्यूंकि में उसकी गांड में हमेशा कंडोम के बिना लंड देता था, वह गांड को ऊँची कर के कुतिया जैसे लेटी. मैंने गांड के छेद के उपर थूंक दिया और लंड धीमे से अंदर किया, थोड़ी ही देर में कूदकूद के सविता भाभी की देसी गांड मारता रहा, सविता चीखती रही और उसकी गांड फटती रही. सुनीता को मैंने इशारा कर के पास बुलाया और उसके चुन्चो से मस्ती चालू कर दी. दोनों भाभी को तृप्ति मिल चुकी थी मेरे जाड़े लंड से और लंड को शांति मिलनी बाकी थी. तभी मेरा लंड जैसे की पूरा हिला और उसके मुख से एक छोटी कटोरी भर जाए उतना वीय निकला. आधा वीर्य सविता भाभी की गांड में रहा और बाकी का बूंदों के रूप में बहार आ गया……हम तीनो खेत से कपडे पहन के मेले में गए और फिर मैं चुपके से अपने घर की और चला गया. दोस्तों मैंने बहुत बार चुत की चुदाई की है अबतक और जब भी मौका मिलता है दोनों को जबरदस्त चोदता हूं.।
दोस्तों मुझे गांड मरवाने मजा आता है दोस्तों अब तो दोनों भाभी अपनी चूत मुझे दे देती है, मैं सविता भाभी का सुक्रगुजार हूँ की वह उस दिन सुनीता को साथ ले आई और मुझे चुदाई का और एक विकल्प मिल गया…..!!!दोस्तों मुझे चुत चाटने में बहुत मजा आता है । मेरे प्यारे मित्रो इस प्रकार हमने बहुत बार चुदाई का मजा लिया और चोदा चोदी की सारी हदे पार कर दी दोस्तों..

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

Loading read count...

0
0

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *