संडे के दिन सिर्फ चूदाई
हैलो दोस्तों! मेरा नाम अमित है और मैं हिसार का रहने वाला हूँ। मेरी एज 24 साल है और मैं काफी फाइ हूं और मेरी हाइट 5 फीट और 7 इंच है।
बात उन दिनों की है जब मैं बाजार से घर जा रहा था रास्ते में एक आदमी पड़ा हुआ था। मैं थोड़ा हिम्मत करके उसके पास गया। उसको अस्थमा का दौरा पड़ा था! वो अपनी जेब से कुछ निकलने की कोशिश कर रहा था! मैंने उसकी जेब से स्वास वाला पंप निकालने में मदद की। कुछ समय के बाद वो कुछ ठीक महसूस करने लगा और मुझे धन्यवाद किया।
मैंने पूछा- अगर आपको कहीं जाना है तो मैं छोड़ दूँ, आपकी तबियत ठीक नहीं है, कहीं दोबारा से दौरा पड़ा तो कौन संभालेगा !
वो मेरी बात मान गए और मेरे साथ कार पर बैठ गए ! कुछ देर में मैं उनको लेकर उनके घर पर पहुंच गया। उन्होंने मुझे घर के अन्दर आने के लिए कहा, अपने परिवार वालों को सारी बात बताई। उनके परिवार वालों ने भी मुझे धन्यवाद कहा। फिर उन्होंने मुझे कॉफी पिलाई!
कॉफी उनकी बेटी ले कर आई थी। जो बहुत ही खूबसूरत थी और उसे मैं बस देखता ही रह गया। फिगर 36-28-36 ! उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि कुदरत ने बड़ी फुरसत से बनाया है। जैसे ही वो मेरी तरफ चाय देने के लिए झुकी, मुझे उसके दो बड़े बड़े संतरों के दर्शन हुए! मन तो कर रहा था कि उसे अभी पटक कर निचोड़ दूं लेकिन अपने आप पर बड़ी मुश्किल से काबू किया।
अचानक उसके पापा के किसी दोस्त का फ़ोन आ गया, वो फ़ोन पर बात करने के लिए बगल वाले कमरे में चले गए और मुझे भी उससे बात करने का मौका मिल गया।
मुझे जब मौका मिला तो मैंने सबसे पहले उसका नाम पूछा और उसने अपना नाम किरण बताया, जो बिल्कुल सूरज की रोशनी की तरह चमक रही थी।
कुछ देर उससे बात करने के बाद मैंने उसका फोन नम्बर मांगा तो उसने तुरंत अपना नंबर मुझे दे दिया और मैंने उसे एक मिस्ड कॉल तुरंत कर दिया जिससे मेरा नंबर उसके पास चला गया। फिर वो किचेन में किसी काम से चली गई ।
मैंने उससे जाते हुए कहा – मैं तुमको कल कॉल करूंगा…
फिर मैंने किरण के पापा को कहा- अब मुझे चलना चाहिए, समय बहुत हो गया है । फिर मैं वहाँ से निकल गया । सारे रास्ते में मैं किरण के बारे में सोचता और उसके संतरे के बारे में दिमाग में चलता रहा कि काश एक बार किरण की की चूत मिल जाये तो क्या बात हो जाये।
घर पर पहुंच कर खाना खाया और सोने चला गया लेकिन बिस्तर पर सिर्फ इस तरफ से उस तरफ करवट बदल रहा था लेकिन नींद आँखों से गायब थी। सिर्फ वही दृश्य दिमाग में चल रही थी और बार बार उसके ख्याल आ रहे थे । फिर अंत में उसके नाम की मूठ मारी और सो गया ।
अगले दिन थोड़ा जल्दी ऑफिस के लिए मैं निकल गया और फिर जैसे तैसे ऑफिस से काम निपटाकर आफिस से बाहर निकला और उसे कॉल किया और उसने एक रिंग में ही मेरा कॉल उठा लिया जैसे मेरे ही कॉल का इंतजार कर रही हो – जैसे ही मैंने हेल्लो कहा, उसने मेरी आवाज़ पहचान ली और कहा- मैं तुम्हारे फ़ोन का ही इंतजार कर रही थी, मुझे पता था कि तुम मुझे आज फ़ोन जरुर करोगे और हुआ भी वैसा ही। ये सुनकर मेरा दिल बहुत खुश हो गया
उसने कल जो मैंने उसके पापा की मदद की थी उसके लिए मेरा धन्यवाद किया और कहा कि वो अपने पापा से बहुत प्यार करती है।
फिर मैंने भी किरण से कहा- किरण, मैं तुम्हें कुछ कहना चाहता हूँ अगर तुम मुझे गलत ना समझो तो कहूँ !
तो वो बोली- अमित जी, आप जो कहना चाहते हो, कह दो !
जैसे कि उसको पता था कि मैं क्या कहना चाहता हूँ !
मैंने कहा- मुझे तुमसे पहली नज़र में प्यार हो गया है, कल सारी रात मुझे नींद नहीं आई, सारी रात तुम्हारे बारे में ही सोचता रहा !
उसने मेरी बातों को पूरा ध्यान से सुना और कहा – जो हाल तुम्हारा था रात में,ठीक वैसा ही हाल मेरा भी था,सारी रात सो नहीं सकी और बस तुम्हारे बारे में ही सोचती रही .! और मुझे भी लगता है कि तुमसे मुझे प्यार हो गया है..!
मैंने उससे कहा कि तुमसे मुझे प्यार हो गया है और उसने कबूल भी कर लिया तो ऐसा लगा जैसे मैंने कोई जंग जीत लिया हो, बोलने से पहले मेरी तो बिल्कुल हालत खराब थी..
लेकिन अब कोई डर नहीं लग रहा था क्योंकि मुझे पता चल गया था कि आग दोनों तरफ से बराबर लगी हुई है और हमलोग रोज़ बातें करने लगे थे,जब ऑफिस का टाइम होता तो सोचता कि जल्दी छुट्टी हो और उससे बातें करें और निकलते ही कॉल या मैसेज कर देता था मैं..।
जब भी आफिस से छुट्टी होती उससे मिलने उसके कॉलेज चला जाता,तो कभी रेस्टोरेंट में खाना खाने, तो कभी सिनेमा हॉल में फिल्म देखने..
यही सब शिलशिला चलता रहा..
कुछ दिनों के बाद एक दिन संडे को हम दोनों ने कहीं बाहर घूमने का प्लान बनाया। और बताये हुए समय पर मैं कार लेकर उसे पिक करने पहुंच गया और उसे लेकर एक सुनसान सड़क के किनारे पर लगाकर जहां कोई तंग करने वाला नहीं था, अंदर बैठकर बातें करने लगे.. और बातों बातों में मैंने अपने हाथ उसके जांघों पर रख दिया.। उसने कोई आपत्ति नहीं जताई जिससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई .. धीरे-धीरे मैंने अपने हाथ उसके जांघों पर फेरना शुरू किया तो उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया और मेरी हिम्मत और बढ़ते चली गई और बातों में मैंने उसे फंसाकर रखा ..!
मैंने उससे पूछा- किरण, क्या मैं तुम्हें चूम सकता हूँ ?
तो उसने मुझे कहा- मुझ पर तुम्हारा पूरा हक है अमित..!
जिसको प्यार करते हैं उससे इजाजत की कोई जरुरत नहीं ! मैं तुम्हें और तुम मुझे प्यार करते हो और अगर तुम्हारा मुझे चूमने का दिल कर रहा है तो कर लो !
फिर क्या था ! जैसे ही उसने ये लाइंस बोली मेरी तो खुशी के चार चाँद लग गए..! और मैं किरण को चूमने लगा। थोड़ी देर तक उसके होंटों को चूमता रहा और धीरे धीरे एक हाथ से उसके स्तनो को दबाने लगा। फ़िर उसके कुर्ती में हाथ डालकर, फिर धीरे से उसकी ब्रा में हाथ डाल कर उसके बुबस मसलने लगा। उसका कुरता ऊपर करके उसके पेट पर चूमने लगा। फिर उसने मुझे रोकते हुए कहा- अमित यहाँ नहीं ! यह जगह सुनसान जरुर है पर सुरक्षित नहीं ! किसी ऐसी जगह चलो जहाँ पर तुम्हारे और मेरे अलावा कोई और न हो !
फिर मैं उसे लेकर एक फाइव स्टार होटल में लेके गया और एक रूम बुक किया और रूम में जाते ही दोनों ने अंदर से रूम लॉक किया और किरण को अपने बाहों में लपेट लिया,उसने भी मेरा पूरा साथ दिया और दोनों कस कर आपस में लिपटे हुए थे जैसे कई जन्मों से दोनों प्यासे थे ऐसी मिलन को… कुछ देर ऐसे ही बाहों में लपेट हुए फिर मैंने उसके होंठो को चूमना शुरू किया तो उसने भी मेरा पूरा साथ दिया और फिर मेरे हाथ उसके स्तनो पर चले गए जो बहुत बड़े बड़े और बिल्कुल टाइट थे ,उसे दवाने लगा और कुछ ही देर में वो भी गर्म हो गई और अपने दाँत से मेरे होंठों और जीभ को काटने लगी जिससे मुझे ऐसा लगने लगा कि मुझे ज्यादा ये प्यासी है इन सब चीजों के लिए..! वो मेरा भरपूर साथ दे रही थी .।
थोड़ी ही देर में मैं उसके कुर्ती और जींस को खोल कर जिस्म से अलग कर दिया जिससे वो सिर्फ ब्रा और पेंट्टी में रह गई फिर मैंने उसे चूमते हुए उसके ब्रा को भी फेक दिया और फिर उसने मेरे कपड़े उतार दिए और अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ कर जो 7 इंच का लंबा और टाइट हो गया था,…आगे पीछे करना शुरू कर दी. फिर मैंने उसके पेंटी को भी उतार दिया कर फेक दिया । मैं उसको चूमता रहा, गर्दन से होते हुए उसके पैर के अंगूठे तक उसको चूमा…
क्या मस्त स्तन थे उसके ! मैं बता नहीं सकता ! गोरे गोरे स्तनों उस पर गुलाबी बुबस मुझे पागल बना रहे थे।
मैं उसके बूब्ज चूसते हुए एक हाथ से उसके बूब्ज दवा रहा था और दूसरे हाथ से उसके योनी को दवा रहा था जो काफी टाइट था.. और उसके बुर से पानी निकल रहा था….
मैंने अपने एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दी, वो सिसक उठी और पागलों की तरह मेरे बालों को नोचने लगी। मैं अपनी ऊँगली उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत से निकाल कर अपनी जीभ से उसकी चूत चाटने लगा। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी। उसने मेरे सर को उसने अपनी चूत पर कस कर दबा लिया और अपने पैरों को मेरी गर्दन के चारों तरफ लपेट लिया और कुछ देर में वो झड़ गई !
मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा तो उसके ऐसे मुँह में लिया जैसे कोई लॉलीपॉप चूस रहा हो। बड़ी मस्ती में वो मेरे लंड को चूस रही थी।
कुछ देर बाद उसने कहा- अमितत, अब बर्दाश्त नहीं होता ! डाल दो अपने लंड को मेरे अंदर और फाड़ दो मेरी चूत को !
मैंने उसकी टांगों को थोड़ा सा ऊपर मोड़ कर लंड को निशाने पर लगाकर एक धक्का दिया। लंड करीब एक इंच तक उसकी चूत में घुस गया था। वो दर्द से तड़प रही थी। मैं लंड उसकी चूत में डाले उस पर पड़ा रहा। जब उसका दर्द कम हुआ तो एक और धक्का मारा। मेरा आधा लंड उसकी चूत में समा चुका था। उसकी चूत से खून निकलने लगा। 20 मिनट तक मैंने धक्के नहीं लगाये, सिर्फ उसके वक्ष को ही मसलता रहा। जब दर्द ख़त्म होने लगा तो लंड महाराज को एक जोरदार धक्के के साथ चूत की जड़ तक पहुंचा दिया। वो दर्द से तड़पने लगी, मुझे लंड बाहर निकलने के लिए बोलने लगी, कहने लगी- बाहर निकालो ! दर्द बहुत हो रहा है ! मैं मर जाउंगी !
करीब दस मिनट बाद उसका दर्द कम हो गया ओर वो नीचे से अपने चूतड़ हिला-हिला कर मेरा साथ देने लगी। अब मैं और वो पूरे जोश में थे।
वो बोल रही थी- जोर से चोदो मेरे राजा ! निकाल दो कचूमर मेरी चूत का ! बहुत तंग किया है इसने मुझे ! पी जाओ मेरी जवानी का रस ! खूब जोर लगा कर चोदो! आईईईईईईईईईईई औररररररर जोर सीई मीएरीईई आआआआअअअ मज़ाआआअअअ आ गया …..
मैं तो डिसचार्ज होने वाली हूँ !
ये कहते हुए वो झड़ गई लेकिन मैं अभी इतनी जल्दी डिस्चार्ज कहाँ होने वाला था। लंड निकाल कर उसकी चूत से मैंने उसके मुँह में दे दिया! वो लंड को चाट-चाट कर मजे ले रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने उसके मुँह से लंड निकाल कर उसको घोड़ी बना कर उसकी चूत में डाल दिया और धक्के लगाने लगा। उसको तो पता नहीं पर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था! वो भी मजे से अपने चूतड़ आगे पीछे कर के मेरा लंड अपनी चूत में डलवाने लगी।
क्या मस्त चुदाई चल रही थी ! पूरा रूम फच फच की आवाज से गूंज रहा था। अब मैं भी झरने वाला था तो मैंने उसको सीधा लिटाया और लंड उसकी चूत में डाल कर धक्के लगाने लगा।
उससे मैंने कहा- किरण, मेरा निकलने वाला है !
तो उसने कहा- आज तो अपनी चूत में तुम्हारा अमृत रस डलवाना है ! अन्दर ही डिस्चार्ज होना ! भर दो अपने अमृत से मेरी चूत को !
और 8-10धक्कों के बाद मैंने अपने सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया और कुछ देर उसके ऊपर ही पड़ा रहा ! थोड़ी देर बाद मैं उस पर से हटा तो देखा कि उसकी चूत की सील टूटने से उसकी चूत से खून और वीर्य बह रहा था। हम दोनों सीधे बाथरूम में गए और खुद को साफ़ किया। इसके बाद बाहर आकर मैं उसको और वो मुझे चूमने लगी। किस करते करते हम दोनों में फिर से जोश आ गया और फिर से उसकी चुदाई शुरू कर दी मैंने !
वो मेरा लंड चूस रही थी, मैं उसकी चूत चाटने लगा। 69 की पोजीशन में थे हम दोनों ! अपनी जीभ मैंने उसकी चूत में अन्दर तक डाल दी। वो लंड को बड़े आनंद लेकर चूसती रही, कभी अंडों को चूसती, कभी लंड ! मैंने उसको खड़ा किया और नीचे झुका। उसकी चूत में पीछे से लंड डाल कर चोदने लगा। उस दिन मैंने उसको चर बार चोदा। फिर करीब एक साल तक उसकी चुदाई की…
कभी होटल में,कभी सिनेमा हॉल में, कभी – कभी तो उसके घर पर ही…
अब उसकी शादी हो चुकी है और जब भी वो मायके आती है मुझसे जरूर चूदवाती है …..
आज भी उसके बारे में जब भी सोचता हूँ बिना मूठ मारे मुझसे रहा ही नहीं जाता है……
यही सब यादगार पलों के साथ मिलते हैं अगली कहानी में ….
धन्यवाद……
Leave a Reply