चाची की सील तोड़ी शादी के बाद

ये कहानी तब की है जब मैं 25 साल का था। मेरे चाचा की नई-नई शादी हुई थी। वो गुरूग्राम में रहते हैं। मैं बस यूँ ही घूमने के लिए दिल्ली गया था। मैं चाचा के घर पर ही रुका। दादी कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं तो वो बुआ के घर चली गई थीं। Chachi ki Chudai Ki Kahani

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मैं सुबह चाचा के घर पहुँचा तो चाचा घर पर ही थे और काम पर जाने की तैयारी कर रहे थे। मुझे देखकर वे बहुत खुश हुए। क्योंकि मैं उनकी शादी में नहीं गया था। चाचा ने मेरा परिचय चाची से कराया। चाची काफी खूबसूरत तो नहीं पर एक अच्छे बदन की मालकिन भी थी।

उसका बदन भरा हुआ था, गोरा रंग, बड़ी-बड़ी चूचियाँ, बड़ी-बड़ी काली आँखें उन्हें खूबसूरत बना रही थीं। मैं चाची को देखता ही रह गया। तब चाची ने खुद ही मुझसे पूछ बैठी, “अजय कहाँ खो गए?” मैं शर्माते हुए कहा, “कहीं तो नहीं।” और झुककर उनके पैर छू लिए।

उनके पैर छूते ही एक अजीब सी खुशी मिली। उसका गोरा पैर बिल्कुल नरम मक्खन सा महसूस हुआ। मैंने चाची की नज़रों में देखा, वो भी सिहर उठी थी। चाचा ने चाय बनाने को कहा। चाची चाय बनाकर लाई। हम तीनों चाय पिए और उसके बाद चाचा ने मुझसे पूछा, “कैसे आए हो?”

तो मैंने कहा, “बस यूँ ही घूमने चला आया। कल चला जाऊँगा।” Chachi ki Chudai Ki Kahani

तब चाचा ने कहा, “अगर घूमने ही जाना है तो अपनी चाची को भी साथ ले जाना, मुझे तो समय ही नहीं मिलता कि कहीं घुमा पाऊँ।”

चाचा हमेशा रात के सवा ग्यारह बजे के बाद ही घर आते हैं। मैं सफर से थक चुका था तो हल्का सा चाचा के बेड पर ही लेट गया। मुझे लगभग नींद सी आ गई थी और मेरे सपने में चाची का खूबसूरत जिस्म घूम रहा था। जिससे मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया था जो मेरी पैंट के ऊपर से साफ दिख रहा था।

अचानक मुझे एहसास हुआ कि मेरे लंड के पास कुछ रेंग रहा है। असल में मेरी चाची मेरे लंड के पास अपने हाथों से सहला रही थी। जैसे ही मैंने आँखें खोलीं, चाची हड़बड़ा कर उठ गई और कहने लगी, “अजय उठो, पहले नहा कर फ्रेश हो जाओ, कुछ खा लो फिर सो जाना।”

मैंने कहा, “नहीं चाची अब रहने दो, अब और क्या सोना। मैं नहा कर फ्रेश हो जाता हूँ, आप भी तैयार हो जाओ, घूमने जाना है ना।”

(यहाँ मैं ये बता देता हूँ कि मेरे चाचा मुझसे उम्र में छोटे हैं, वो मेरे दादाजी की दूसरी बीवी की संतान हैं।)

चाची ने कहा, “ठीक है, तुम जाकर आंगन में नहा लो, मैं बाथरूम में नहा लेती हूँ।”

मैं नहाने चला गया और जब वापस आया तो मेरी तो जैसे होश ही उड़ गए। चाची सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में आईने के पास बैठकर खुद को संवार रही थी। वो ब्लैक कलर का ब्लाउज और ब्लैक कलर की ही पेटीकोट में थी। क्या गज़ब का नज़ारा था।

मुझे आईने में उसके ब्लाउज में से झाँकता हुआ चूचियों की गहराई साफ दिख रही थी। मैं तो जैसे अपने होश ही खो बैठा था। तभी आईने में चाची ने मुझे देख लिया पर उसने अपने चूचियों के बारे में कुछ भी ख़याल न करते हुए मुझसे पूछा, “नहा लिए अजय?” मैंने खुद को संभालते हुए हाँ में जवाब दिया।

चाची ने कहा, “कुछ चाहिए?” Chachi ki Chudai Ki Kahani

तो मैंने कहा हाँ, मुझे कंघी चाहिए।

तो उसने कहा, “यहाँ है ले जाओ।”

मैं बिल्कुल चाची के पास पहुँच गया और कंघी लेने के बहाने जरा सा उसके शरीर को छू लिया। जब चाची इतनी बिंदास होकर तैयार हो रही थी तो मैं भी वहीं खड़ा होकर चाची को देखते हुए तैयार होने लगा। जब चाची तैयार होकर खड़ी हुई तो कयामत लग रही थी। ब्लैक कलर का ब्लाउज और पेटीकोट, होंठों पर पिंक कलर।

वो बिल्कुल हुस्न की परी लग रही थी। वो उठकर ठीक मेरे सामने आ गई। उसकी दोनों चूचियाँ बाहर आने के लिए मचल रही थीं और मेरे हाथों में तो उन चूचियों को ज़ोर से मसलने के लिए खुजलियाँ हो रही थीं। पर मैं मजबूर था। 

चाची ने तब मुझसे कहा, “अजय, प्लीज़ मेरी साड़ी देना। वहाँ वो ब्लैक साड़ी पड़ी है, वो ही देना।”

मैंने साड़ी उठाकर चाची को दी। इस दौरान मैं तैयार हो चुका था। चाची अपनी साड़ी बाँध रही थी। वो साड़ी को अपनी नाभि के काफी नीचे बाँध रही थी जिससे उसकी नाभि और उसकी गहराई साफ दिख रही थी। उसका गोरा चिकना पेट देखकर मैं तो सोचने लगा कि काश हम घूमने न जाते और यहीं पर एक चुदाई का प्रोग्राम शुरू हो जाता तो क्या खूब होता।

तभी चाची ने मुझसे कहा, “अजय जरा ये साड़ी का पल्लू तो पकड़ना।” Chachi ki Chudai Ki Kahani

मैं तुरंत चाची का पल्लू पकड़ लिया और वो आँचल ठीक करने लगी। मैं सिर्फ चाची की चूचियों को देख रहा था।

तब चाची ने कहा, “क्या देख रहे हो?”

मैंने कहा, “कुछ भी तो नहीं।”

फिर चाची तैयार हो गई और हम दोनों घूमने के लिए निकल पड़े। हम दोनों ऑटो में जाकर बैठे। ऑटो में और भी लोग थे। चाची बिल्कुल मेरे पास बैठी थी जिससे उसका पूरा शरीर मेरे शरीर से चिपका हुआ था। मुझे काफी अच्छा लग रहा था। बीच-बीच में जब ऑटो हिलता था तो वो पूरी तरह मेरी बाहों में लुढ़क जाती थी जिससे उसकी चूचियाँ कई बार मेरे हाथों से दब भी जाती थीं।

उसके जिस्म के एहसास को महसूस करते हुए हम कब “कनाट पैलेस” पहुँच गए, इस बात का पता ही नहीं चला। हम दोनों सेन्ट्रल पार्क के गार्डन में घुस गए और एक जगह पेड़ के नीचे घास पर बैठ गए। आमने-सामने और भी कई जोड़े बैठे थे और एक-दूसरे के साथ अश्लील हरकतें भी कर रहे थे। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे उन लोगों की हरकतों को देखकर चाची भी गरम हो रही है।

मैंने पूछा, “चाची कोई टेंशन है क्या? अगर ऐसी बात है तो कहीं और चलें?”

तो चाची ने कहा, “नहीं यहीं ठीक है।”

फिर चाची ने कहा, “अजय, एक बात पूछूँ, सही जवाब दोगे?”

मैंने कहा, “हाँ, पूछो।”

तो उसने कहा, “सच बताओ तुम घर पर क्या देख रहे थे?”

तो मैंने भी हिम्मत करते हुए कहा, “सच कहूँ चाची तो मैं तुम्हें और तुम्हारी खूबसूरती को देख रहा था।”

तब चाची ने कहा, “और?”

मैंने कहा, “तुम्हारी ये चूचियाँ जो मुझे बार-बार तुम्हारी तरफ देखने को मजबूर कर रही थीं। पर चाची एक बात बताओ, जब मैं सो रहा था तब तुम मेरे पास क्या कर रही थीं?”

तब चाची रोने लगी और मुझसे लिपट गई।

मैंने कहा, “चाची क्या बात है, बताओ ना।” Chachi ki Chudai Ki Kahani

तब चाची रोते हुए मुझे बताई, “अजय जब से मैंने तुम्हें देखा है ना जाने क्यों मुझे तुम अच्छे लगने लगे हो। अजय मैं बहुत प्यासी हूँ। जब से मेरी शादी हुई है तुम्हारे चाचा ने सिर्फ मेरी चूचियाँ दबाई हैं, मेरी चूत पर हाथ फेरते हैं, मेरी चूत पर उँगली भी डालते हैं पर आज तक मेरी चूत कुँवारी है।”

मैं चौंकते हुए कहा, “चाची क्या कह रही हो?”

चाची ने कहा, “ये सच है अजय। आज तक तुम्हारे चाचा ने अपना लंड मेरी चूत में नहीं डाला है। उनका लंड खड़ा तो होता है पर मेरी चूचियों को दबाने और मेरी चूत को हाथ लगाने भर से ही झड़ जाता है। आज जब तुम सो रहे थे तो तुम्हारा लंड तनकर खड़ा था। मैं खुद को रोक नहीं पाई और तुम्हारे लंड को सहलाने लगी। पर तुम जाग गए।

मुझे माफ कर दो अजय, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। पर मैं क्या करती अजय, मैं एक औरत हूँ और प्यासी भी हूँ। तुम्हारे तने हुए लंड को देखकर मैं खुद को नहीं रोक सकी। अजय क्या तुम मेरी प्यास बुझाओगे? अजय देखो प्लीज़ ना मत करना। एक प्यासे की प्यास बुझाना पुण्य का काम होता है। अजय ये घर की बात है घर पर ही रहेगी। मैं बाहर किसी से चुदवाना नहीं चाहती अजय।”

उसकी मुँह से इतनी ओपन बातें सुनकर और उसके जिस्म को अपने शरीर में पकड़कर मेरा लंड खड़ा हो गया था। मैंने चाची को ज़ोर से अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा। दूसरी हाथों से ब्लैक ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूचियों को मसलने लगा। 

जब मैं उसके होंठों को चूसकर उसका सारा रस पीकर उससे अलग हुआ तो उनकी आँखें लाल हो गई थीं। वो इसी वक्त लंड अपने चूत में लेना चाहती थी। पर मैंने उसे समझाया और कहा कि घर चलते हैं। और हम दोनों वहाँ से घर के लिए चल पड़े। घर पहुँचते ही हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में समा गए। Chachi ki Chudai Ki Kahani

मैं उसके चूचियों को अपने दोनों हाथों से ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा। उसके मुँह से “आह्ह… आह्ह… ऊह्ह… आऊच्ह…” की आवाज़ें आने लगी। वो बिल्कुल अपने होश खो बैठी थी। मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा। उसकी आँखें लाल होने लगीं और उन आँखों में सेक्स झलकने लगा।

मैंने तुरंत उसकी ब्लैक साड़ी को उसके शरीर से अलग कर दिया। अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी। उसकी तनी हुई चूचियाँ मुझे ललचा रही थीं। तभी चाची ने एक गहरी अँगड़ाई लेकर बिस्तर में लेट गई। जिससे उसकी तनी हुई चूचियाँ उसके साँसों के साथ ऊपर-नीचे होने लगीं।

मैंने तुरंत अपने कपड़े उतारे और उसके खुले नंगे पेट पर अपना मुँह रख दिया और उसकी पेट और नाभि को जमकर चूमने लगा। मैंने अपना हाथ उसके चूचियों पर रखा तो वो ज़ोर से सिसकने लगी। मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोल दिए तो उसकी ब्लैक रंग की ब्रा में खिल रही थीं ,दूध से भी गोरे जिस्म पर ब्लैक ब्रा और पेटिकोट क्या कहर ढा रहे थे वो मैं शब्दों में लिखकर बयाँ नहीं कर सकता …..

चूचियों का आधा से ज़्यादा हिस्सा ब्रा के बाहर था। मैं ब्रा के ऊपर से ही उनकी चूचियों को चूमने लगा। वो मदहोश होकर मेरे मुँह को अपने चूचियों पर रगड़ने लगी। मैं उसकी चूचियों का मज़ा लेते हुए ही उसके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और उसे नीचे सरका दिया। उसके गोरे मांसल बदन पर सफेद रंग के दो छोटे-छोटे कपड़े (ब्रा और पैंटी) काफी खूबसूरत लग रहे थे।

मैंने देखा कि उसकी पैंटी भीगी हुई है, और उसमें से एक भिनी-भिनी खुशबू आ रही है। पैंटी भीगी भी क्यों न, वो तो आज सुबह से ही मुझसे चुदवाने के सपने देख रही थी। मैंने अपना एक हाथ उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसके चूत पर रख दिया। वो काँप उठी। आज पहली बार उसकी चूत पर कोई दूसरा हाथ पड़ा था।

मैं पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को मसलने लगा। एक हाथ से उसके चूचियों को तो दूसरी से उसकी चूत को मसल रहा था। और वो सिर्फ सिसकारियाँ भर रही थी। “आह्ह… ऊह्ह… म्म्ह्ह… क्च्छ… आह्ह…” अब मैंने उसे उठाकर बैठा दिया और उसके पीछे जाकर बैठ गया और उसके ब्रा के हुक खोल दिए। Chachi ki Chudai Ki Kahani

उसके बाहों के नीचे से अपना हाथ ले जाकर उसके दोनों चूचियों को ज़ोर से पकड़ा और दबाने लगा। उसकी चूचियाँ दबाने में मुझे भी काफी मज़ा आ रहा था। उसकी चूचियाँ कठोर और तनी हुई थीं। मैं चूचियों को दबाते हुए अपना एक हाथ उसके नाभि को सहलाते हुए उसके पैंटी के अंदर डाल दिया।

ऊफ्फ मुझे लगा मेरा हाथ किसी चिकनी जगह पर फिसल रही है। उसकी चूत में एक भी बाल नहीं था और चूत उसकी बिल्कुल गीली हो चुकी थी। मैं अपने एक हाथ से उसकी चूत को भी दबाने लगा और कहा, “चाची काश तुम मेरी बीवी होती? तो मैं तुम्हें इतना चोदता कि तुम्हारी चूत अब तक तुम्हारी चूत के सारे नसों को मैं ढीला कर चुका होता.।

तब चाची बोली, “अजय, प्लीज़ मुझे चाची मत बुलाओ, मैं अब पूरी तरह तुम्हारी हो चुकी हूँ। तुम्हारी बीवी बन गई हूँ। आज मुझे ऐसी चुदाई चाहिए कि मैं ज़िंदगी भर याद रखूँ। मुझे तुम अपनी बीवी समझकर जैसे चाहते हो वैसा चोदो। मैं तुम्हारे लंड की प्यासी हूँ अजय, प्लीज़ आज मेरे बुर की प्यास अपने लंड के पानी से बुझा दो।”

तब मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत को दबाते हुए अपनी 2 उँगलियाँ उसके चूत में डाल दीं और अंदर-बाहर करने लगा। तब चाची बोली, “अजय, प्लीज़ अब तड़पाना बंद करो, मेरी चूत तुम्हारे लंड की प्यासी है। मेरी चूत में उँगलियाँ तो तुम्हारे चाचा भी डालते हैं। आज मुझे और मेरी बुर को तुम्हारे लंड की ज़रूरत है। प्लीज़ अपने लंड से मेरी बुर को आज फाड़ डालो। मैं लंड से अपनी बुर चुदवाने के लिए तड़प रही हूँ, अजय।”

फिर मैंने उसकी पैंटी उतार दी और अपना लंड जो तनकर खड़ा हो गया था और चाची के बुर को फाड़ डालना चाहता था, मैंने अपना लंड चाची के बुर के होंठों में रखा और धीरे से दबाया। चाची की बुर पहले ही 2 बार झड़ चुकी होने के कारण पूरी गीली थी इसलिए मेरा आधा लंड सरसराता हुआ चाची की बुर में जा घुसा।

चाची के मुँह से हल्की सी प्यारी सिसकारी निकली… “ऊह्हााह्ह… म्म्ह्ह… आम्म… अजय, प्लीज़ रुको नहीं, तुम जितनी ज़ोर से चाहो आज मेरी बुर को चोद दो। आज मुझे ऐसा लग रहा है जैसे आज मेरी सुहागरात है, और तुम ही मेरे पति हो। आज मेरी बुर तुम्हारी है अजय, इसे बिल्कुल मत छोड़ो, इसे चोदकर आज फाड़ दो। इसे आज इतना चोदो कि तुम्हारे अगली बार आने तक भी ये सिर्फ तुम्हारी ही यादों में रहे।”

मैंने अपना लंड को हल्का सा बाहर की तरफ खींचा और फिर एक ज़ोर सा झटका दिया जिससे मेरा लंड चाची की कुँवारी चूत को फाड़ते हुए अंदर चला गया। चाची के मुँह से एक चीख निकल गई और उसके चूत से खून भी रिसने लगा।

चाची बोली, “अजय, तुम मेरे चिल्लाने की और दर्द की फिक्र मत करना, बस आज तो मुझे ऐसा चोदो कि मैं तुम्हारी गुलाम हो जाऊँ। मेरे चूत का हर नस फट जाए, प्लीज़ ऐसा चोदो कि मेरा बुर फटकर भोसड़ा बन जाए।”

मैंने अब झटके काफी ज़ोर-ज़ोर से लगाना शुरू किया। चाची चिल्लाती रही, उसके मुँह से दर्द और कामुकता के मिले-जुले आवाज़ निकल रही थी। “आह्ह… ऊह्ह… म्म्ह्ह… आह्ह… आऊच्ह…” मैं अपना झटका तेजी से जारी रखा और चाची की जमकर चुदाई करता रहा।

मैं लगातार ज़ोर-ज़ोर से चुदाई करता रहा जिससे चाची झड़ गई और मेरा लंड उसके बुर के रस से भीग गया। फिर मैंने चाची को पीछे घुमाया और चाची के चूतड़ को थोड़ा सा ऊपर उठाकर चाची को डॉगी स्टाइल में बैठा दिया जिससे उसकी बुर फूलकर मेरे लंड के सामने आ गई और मैं अपना लंड उसके बुर में रखकर ज़ोर-ज़ोर से उसे चोदने लगा।

मैं उसकी चूत को चोद रहा था और अपने हाथ उसके कमर से लेते हुए उसकी चूचियों को काफी ज़ोर से मसल रहा था जिससे उसकी गोरी चूचियाँ लाल हो गई थीं। उस पोजीशन में मैंने उसे लगभग आधा घंटा तक चोदा और जब मुझे लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने उसे फिर से सीधा लिटा दिया और उसकी टाँगों को फैला दिया और उसकी चूत में अपना लंड डालकर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा।

चाची भी बिल्कुल मस्त होकर मुझसे चुदवाती रही। फिर हम दोनों एक साथ झड़े और एक-दूसरे की बाहों में समाकर सो गए। लगभग आधे घंटे के बाद मैंने देखा कि चाची उठकर बाथरूम की तरफ जा रही है पर उससे ठीक से चला भी नहीं जा रहा है तो मैंने उठकर उसे अपनी बाहों में उठा लिया और बाथरूम ले गया। वो मेरे सामने ही बैठकर पेशाब करने लगी। Chachi ki Chudai Ki Kahani

फिर से मैंने उसे गोद में उठाकर बिस्तर तक ले आया और उसकी चूचियों और बुर को सहलाने लगा। चाची फिर से गरम हो चुकी थी। मैं भी आज जी भरकर उसे चोदना चाह रहा था। क्योंकि चाची अब तक कुँवारी थी। उसकी बुर की सील मैंने तोड़ी। 

चूँकि मैं दूसरे दिन वापस होने वाला था इसलिए मैं कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता था। मैं फिर से उसको जमकर चोदा। रात के 10 बजे तक मैंने उसे 5 बार चोदा और उसे पूरी खुशी दी और मैंने भी पूरे मज़े लिए एक कुँवारी चाची के बुर की सील तोड़कर। वो मुझसे चुदवाकर काफी खुश थी। चाचा के आने का वक्त हो गया था तो हम दोनों बाथरूम में जाकर फ्रेश हुए और कपड़े पहनकर टीवी देखने लगे।

दूसरे दिन चाची सुबह उठकर नहा-धोकर बिल्कुल सज-संवरकर मुझे जगाने चली आई। मैंने उसे देखा तो उससे एक किस माँगी तो उसने मुझे मना कर दिया, कहा कि चाचा के जाने के बाद दे दूँगी। चाचा भी तैयार होकर ऑफिस के लिए निकलने लगे। मैंने कहा कि “चाचा आज मैं दोपहर को चला जाऊँगा।” तो उसने कहा, “ठीक है, खाना खाकर आराम से चले जाना।” इतना कहकर चाचा निकल गए। चाचा के जाते ही मैंने झपटकर चाची को अपनी बाहों में ले लिया और उसके पूरे बदन पर किस करने लगा।

उसकी चूचियों को फिर से दबाने लगा। और तुरंत उसे फिर से नंगा कर दो बार और चोदा। जब दोपहर को मैं वापस आने के लिए तैयार हुआ तो चाची उदास हो गई थी। वो बोली, “फिर कब आओगे?” तो मैंने कहा, “मेरी जान बहुत जल्दी आऊँगा और तुम्हारी पूरी सेवा करूँगा। तुम्हारी चूत चोदकर तो इतना मज़ा आया कि जाने का दिल ही नहीं चाहता है। पर क्या करूँ, जाना तो पड़ेगा ही।” और फिर एक ज़ोरदार किस चाची के होंठों पर देकर मैं वापस आ गया..।

ऐसे ही मजेदार और रसीले कहानियों का मजा लेते रहें antarvasna4u.com पर 

धन्यवाद….

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