दोस्त की शादी में एक्स गर्लफ्रेंड के साथ जबरदस्त चुदाई

ये चुदाई की एक ऐसी सेक्स कहानी है जिसे मैं आज तक किसी को नहीं बता पाया, एक ऐसा सच जो मेरे सीने में सालों से दफ़न था और अब मुझे लगता है कि इसे बाहर आना ही चाहिए। मेरा नाम नवीन है, उम्र 26 साल, और मैं ग्वालियर में एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर एनालिस्ट हूँ। ये कहानी पिछले साल दिसंबर की है, जब मेरे सबसे अच्छे दोस्त रोहन की शादी थी। रोहन की शादी उदयपुर के एक फाइव स्टार होटल में रखी गई थी। पूरा परिवार, रिश्तेदार, दोस्त सब वहीं ठहरे हुए थे। मैं भी शादी के चार दिन पहले उदयपुर पहुँच गया था, क्योंकि बैचलर पार्टी और दूसरी तैयारियों में मदद करनी थी। मेरे दिल में एक अजीब सी बेचैनी थी, लेकिन उसकी वजह मुझे उस वक्त नहीं पता थी।
होटल बहुत भव्य था। शीशे की दीवारें, संगमरमर के फर्श और दूर तक फैली दूधिया रोशनियाँ। मैं अपने कमरे में सामान रखकर नीचे लॉबी में आया ही था कि मेरी नज़र एक जानी-पहचानी शख्सियत पर पड़ी। वो दूर खड़ी थी, लेकिन मैं उसे पहचान गया। वो थी सुमन, मेरी एक्स गर्लफ्रेंड। हम दोनों ने कॉलेज में तीन साल साथ बिताए थे, लेकिन नौकरी और करियर की वजह से हमारे रास्ते अलग हो गए थे। उस वक्त का ब्रेकअप बहुत दर्दनाक था। उसे देखते ही मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। वो 25 साल की थी, पहले से भी ज़्यादा खूबसूरत। उसने गहरे हरे रंग की साड़ी पहनी थी और हल्का मेकअप किया हुआ था। उसकी आँखों में वही पुरानी चमक थी, और होंठों पर वही पुरानी मुस्कान।
हमारी नज़रें मिलीं और वो ठिठक गई। मैंने हाथ हिलाया और धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा। उसने भी कदम बढ़ाए। पास आकर मैंने कहा, |सुमन, तुम यहाँ| वो थोड़ा झिझकी, फिर बोली, |हाँ,रोहन मेरा कज़न लगता है| मैं चौंक गया। रोहन ने मुझे कभी नहीं बताया था कि सुमन उसकी रिश्तेदार है। खैर, हमने हालचाल पूछे। बातों-बातों में पता चला कि वो भी अकेली आई है और होटल के तीसरे फ्लोर पर रुकी है। उसकी शादी नहीं हुई थी। न जाने क्यों, ये सुनकर मुझे अंदर ही अंदर एक अजीब सी खुशी हुई। उसने भी मेरे बारे में पूछा और जब मैंने बताया कि मैं भी सिंगल हूँ, तो उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आई।
शादी की रस्में शुरू हो गईं। हल्दी, मेहंदी, संगीत, सब कुछ धूमधाम से हो रहा था। लेकिन मेरी नज़रें बार-बार सुमन को ढूँढ रही थीं। वो भी जब मौका मिलता, मेरी तरफ देख लेती। हमारी आँखों में एक अनकही बात होती, जो शब्दों से परे थी। संगीत की रात को हमने साथ डांस भी किया। उसका हाथ मेरे हाथ में था और हम दोनों पुराने दिनों में खो गए। उसकी खुशबू, उसकी बातें, उसकी हँसी, सब कुछ वैसा ही था जैसे कॉलेज के दिनों में होता था। डांस के बाद वो मुझसे बोली, |नवीन, मुझे तुमसे बहुत सी बातें करनी हैं| मैंने कहा, |जब चाहो, मैं तुमसे मिलने आ जाऊँगा| उसने धीरे से कहा, |आज रात, शादी के बाद, मेरे कमरे में|
मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गई। रात तक का इंतज़ार करना बहुत मुश्किल था। शादी की रस्में रात साढ़े ग्यारह बजे खत्म हुईं। सब लोग अपने-अपने कमरों में चले गए। मैंने ये सुनिश्चित किया कि कोई मुझे देख न रहा हो, और चुपके से तीसरे फ्लोर पर सुमन के कमरे पर पहुँच गया। दरवाज़ा खटखटाया तो उसने खोल दिया। वो अब भी अपनी साड़ी में ही थी, लेकिन गहने उतार चुकी थी। उसने मुझे अंदर बुलाया और दरवाज़ा बंद कर दिया। कमरे में हल्की रोशनी थी और एक अजीब सी खामोशी थी। वो मेरे सामने खड़ी हो गई और बोली-नवीन,पता है,मैंने तुम्हें बहुत मिस किया है। मैंने कहा-मैंने भी सुमन..और उसे अपनी तरफ खींचकर गले लगा लिया।
उसे गले लगाते ही पुरानी सारी यादें ताज़ा हो गईं। हम दोनों चुपचाप एक दूसरे की बाँहों में खड़े रहे, बस एक दूसरे की धड़कन सुन रहे थे। फिर सुमन ने अपना चेहरा ऊपर उठाया और हमारे होंठ एक दूसरे से मिल गए। ये चुंबन सालों की प्यास बुझाने वाला था। हम एक दूसरे को ज़ोर-ज़ोर से चूमने लगे, जैसे कोई भूखा शिकारी अपना शिकार नोच रहा हो। मेरे हाथ उसकी कमर पर थे और उसने अपनी बाँहें मेरी गर्दन में डाल दी थीं। मेरी जीभ उसके मुँह के अंदर घुस गई और हम एक गहरे फ्रेंच किस में डूब गए। उसके होंठ बहुत मुलायम और गर्म थे। वो बीच-बीच में हल्की-हल्की कराह रही थी, जो मेरी उत्तेजना को और बढ़ा रही थी।
हम किस करते-करते बिस्तर तक पहुँच गए। मैंने सुमन की साड़ी का पल्लू हटाया और उसकी गर्दन पर चुंबन करने लगा। उसने अपनी गर्दन पीछे की और कराही, |उह्ह्ह्ह, नवीन, मैं कितनी तरस गई थी तुम्हारे लिए| मेरे होंठ उसके कंधों से होते हुए नीचे की तरफ बढ़े। मैंने उसका ब्लाउज खोलने की कोशिश की, लेकिन हुक बहुत टाइट थे। सुमन ने मुस्कुराकर खुद ही अपने ब्लाउज के हुक खोल दिए और वो कपड़ा फर्श पर गिर गया। उसके स्तन हल्के काले ब्रा में बंधे हुए थे। मैंने ब्रा के हुक भी खोल दिए और उसकी खूबसूरत चूचियाँ बाहर आ गईं। वो उतनी ही सुडौल और आकर्षक थीं, जितनी मुझे याद थीं। मैंने एक निप्पल को मुँह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा।
सुमन ज़ोर से कराह उठी, |आआह्ह्ह्ह, हाँ… नवीन, बिल्कुल पहले जैसा…| मैं बारी-बारी से उसकी दोनों चूचियों पर अपनी जीभ फेरता रहा, उन्हें चूसता रहा, हल्के-हल्के दाँतों से काटता रहा। उसने मेरे बाल पकड़ रखे थे और मुझे अपने सीने से चिपका रखा था। उसका शरीर गर्म हो रहा था और साँसें तेज़ होती जा रही थीं। फिर मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट उतार दिया। अब वो सिर्फ अपनी लेस की पैंटी में मेरे सामने थी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी जाँघों पर चुंबन करने लगा। उसकी त्वचा रेशम जैसी मुलायम थी। मैं धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ा और उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चुत को सहलाने लगा। पैंटी पहले से ही गीली थी।
मैंने उसकी पैंटी उतार दी और उसकी चुत मेरे सामने थी। सुमन की चुत बहुत साफ-सुथरी थी, बस हल्के से बाल और एकदम गुलाबी। वो पूरी तरह से भीगी हुई थी और उसमें से एक मीठी सी खुशबू आ रही थी। मैंने अपना चेहरा उसकी टाँगों के बीच रखा और अपनी जीभ बाहर निकालकर उसके क्लिट पर हल्का सा स्पर्श किया। सुमन का शरीर तड़प उठा, |आआअह्ह्ह्हह… नवीन, ये क्या कर रहे हो…| मैंने कोई जवाब नहीं दिया और अपनी जीभ से उसकी पूरी चुत को चाटना शुरू कर दिया। मैं उसकी चुत के हर कोने को अपनी जीभ से साफ कर रहा था। उसका स्वाद नमकीन और मीठा दोनों था। मैंने अपनी दो उँगलियाँ उसकी चुत में डालीं और अंदर-बाहर करने लगा। मेरी उँगलियाँ उसके गीलेपन में डूब गईं।
सुमन ज़ोर-ज़ोर से कराह रही थी, |हाँ, हाँ, ऐसे ही… अपनी जीभ और तेज़ चलाओ… मुझे चूस लो पूरा| मैंने उसकी चुत को चूसना शुरू कर दिया और अपनी जीभ उसके क्लिट पर तेज़ी से हिलाई। उसका पूरा शरीर काँपने लगा। उसने मेरे बाल ज़ोर से पकड़े और अपनी चुत मेरे मुँह पर रगड़ने लगी। कुछ ही सेकंड में वो चीख पड़ी, |आआअह्ह्ह्हह… मैं आ रही हूँ नवीन… हाँ… बस…| और उसकी चुत से गर्म धार निकलकर मेरे मुँह में भर गई। मैंने उसका सारा रस चाट लिया और निगल गया। सुमन पूरी तरह से ढीली पड़कर बिस्तर पर पसर गई।
कुछ देर बाद सुमन ने अपनी आँखें खोलीं और मुस्कुराई। उसने कहा, |अब तुम लेट जाओ, तुम्हारी बारी| मैं पीठ के बल लेट गया और सुमन ने मेरी पैंट और अंडरवियर उतार दिया। मेरा लंड पूरी तरह से तना हुआ था और हवा में खड़ा था। सुमन ने उसे देखा और उसकी आँखें चमक उठीं। वो बोली, |पहले से भी बड़ा हो गया है तुम्हारा लण्ड| मैंने हँसकर कहा, |तुम्हारी याद में और सख्त हो गया है| उसने अपना हाथ बढ़ाकर मेरा लौड़ा पकड़ लिया और हल्के-हल्के सहलाने लगी। फिर उसने झुककर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया।
सुमन एक कुशल चुदक्कड़ लड़की की तरह मेरा लंड चूस रही थी। उसकी जीभ मेरे लण्ड के निचले हिस्से पर फिर रही थी और वो पूरा ध्यान से हर तरफ से चाट रही थी। वो मेरे लंड को पूरी तरह से अपने मुँह में लेकर ऊपर-नीचे कर रही थी। मेरा लौड़ा उसकी लार से पूरी तरह से भीग चुका था। वो बीच-बीच में मेरे अंडकोषों को भी चूस लेती। मैं ज़ोर-ज़ोर से कराह रहा था, |आआह्ह्ह्ह, सुमन… बहुत अच्छा चूसती हो तुम… उह्ह्ह्ह…| उसने मेरी तरफ देखा और आँख मारी, फिर और तेज़ी से मेरा लंड चूसने लगी। उसने मेरे लौड़े को थोड़ा सा बाहर निकाला और सिर्फ उसके ऊपरी हिस्से पर अपनी जीभ से गोल-गोल घुमाने लगी। ये एहसास बहुत ही शानदार था।
फिर सुमन ने अपना मुँह हटाया और बोली, |अब मैं तुम्हारे लंड को अपनी चुत में लेना चाहती हूँ| वो मेरे ऊपर सवार हो गई। उसने अपने हाथ से मेरा लण्ड पकड़ा और धीरे-धीरे अपनी चुत पर रगड़ा। फिर एक झटके में बैठ गई और मेरा पूरा लंड उसकी चुत में समा गया। हम दोनों के मुँह से एक साथ आवाज़ निकली, |आआअह्ह्ह्हह| सुमन की चुत बहुत टाइट और गर्म थी। उसने मेरे सीने पर हाथ रखकर ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया। वो ज़ोर-ज़ोर से उछल रही थी और उसके स्तन हवा में उड़ रहे थे। ये नज़ारा बहुत कामुक था। मेरी एक्स गर्लफ्रेंड, जिससे मैं सालों बाद मिला था, वो मेरे लंड पर सवार होकर अपनी चुदाई करवा रही थी। वो बोली, |नवीन, तुम्हारा लंड आज भी मेरी चुत में उतना ही अच्छा लगता है|
मैंने उसके कूल्हों को पकड़कर नीचे से ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। अब हम दोनों एक साथ चल रहे थे। हर बार जब मेरा लंड उसकी चुत के अंदर जाता, एक गीली आवाज़ निकलती। सुमन चिल्ला रही थी, |हाँ… और ज़ोर से… अपनी एक्स को चोदो… मुझे बताओ कि तुमने मुझे कितना मिस किया| मैंने अपनी रफ्तार और तेज़ कर दी और बोला, |बहुत मिस किया… तुम्हारी इस चुत को बहुत याद किया| सुमन मेरे ऊपर चुदवाती हुई अपने कूल्हों को गोल-गोल घुमा रही थी। उसकी साँसें बहुत तेज़ हो गई थीं और वो पसीने से तर-ब-तर थी। कुछ देर बाद वो ज़ोर से चीखी और मेरे ऊपर ही गिर पड़ी। उसका दूसरा ऑर्गैज़म निकल गया था।
लेकिन मैं अभी तक पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हुआ था। मेरा लंड अभी भी सख्त था। मैंने सुमन को अपने नीचे किया और उसकी टाँगों को अपने कंधों पर रख दिया। फिर मैंने अपना लण्ड उसकी चुत में डाला और ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया। इस पोजीशन में मेरा लंड बहुत गहराई तक जा रहा था। हर चोदते वक्त सुमन का शरीर बिस्तर पर उछल रहा था। वो ज़ोर-ज़ोर से कराह रही थी, |आआह्ह्ह्ह… हाँ नवीन… मेरी चुत फाड़ दो… ऐसे ही चोदो…| मैंने उसके स्तनों को पकड़कर ज़ोर से दबाया और अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। मेरे अंडकोष उसकी गांड पर ज़ोर-ज़ोर से टकरा रहे थे। पूरा कमरा हमारे जिस्मों की टकराने की आवाज़ों से गूँज रहा था।
फिर मैंने सुमन को उलटा दिया और डॉगी पोजीशन में कर लिया। उसने अपने हाथ बिस्तर पर टिकाए और अपनी गांड को ऊपर उठा दिया। मैंने पीछे से उसकी चुत में अपना लण्ड डाला और ज़ोर-ज़ोर से चोदाई शुरू कर दी। इस एंगल में मेरा लंड उसकी चुत की दीवारों को रगड़ रहा था और सुमन ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी। मैंने उसके बाल पकड़ लिए और हल्के से खींचे। वो और तड़प उठी। मेरी रफ्तार अब बहुत तेज़ हो गई थी। मुझे लग रहा था कि मैं अब निकलने वाला हूँ। मैंने कहा, |सुमन, मैं आ रहा हूँ| वो बोली, |हाँ, मेरी चुत में ही निकालो… भर दो मुझे अंदर से|
ये सुनते ही मैंने कुछ आखिरी बहुत तेज़ और गहरे धक्के लगाए। मेरे लण्ड की नसें फूल गईं और पूरा लौड़ा अकड़ गया। एक ज़ोरदार कंपन के साथ मैं उसकी चुत के अंदर ही झड़ गया। मेरे मुँह से चीख निकली, |आआअह्ह्ह्हह… सुमन… लो…| मेरा गाढ़ा माल उसकी चुत में भर गया। साथ ही साथ सुमन भी अपने तीसरे ऑर्गैज़म पर पहुँच गई और वो पूरी तरह से काँप उठी। हम दोनों एक दूसरे से लिपटकर बिस्तर पर गिर पड़े। हमारे शरीर पसीने से नहाए हुए थे और साँसें बहुत तेज़ चल रही थीं।
काफी देर तक हम चुपचाप लेटे रहे, एक दूसरे की धड़कनें सुनते हुए। सुमन ने धीरे से मेरी छाती पर हाथ रखा और बोली, |नवीन, पता है, तुम मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी गलती थे और सबसे बड़ी खुशी भी| मैंने उसके माथे पर चुंबन किया और कहा, |मैंने भी तुम्हें हमेशा याद किया, सुमन| हम दोनों समझ रहे थे कि ये पल कितना अनमोल है। उसके बाद हम दोनों ने साथ में नहाया और एक दूसरे के शरीर पर साबुन लगाया। शॉवर के नीचे भी हम काफी देर तक लिपटे रहे और एक बार फिर से प्यार किया।
अगले दिन शादी की बाकी रस्में थीं। हम दोनों ने एक दूसरे से दूरी बनाए रखी, लेकिन हमारी नज़रें बार-बार मिलती रहीं। सुमन ने मुझे अपना नया नंबर दिया और हमने वादा किया कि एक दूसरे से संपर्क में रहेंगे। शादी के बाद मैं वापस ग्वालियर आ गया और सुमन अपने शहर लौट गई। लेकिन ये रात हम दोनों की ज़िंदगी में एक मोड़ ले आई। उसके बाद हमारी बातचीत फिर से शुरू हो गई और कुछ महीनों बाद हमने साथ रहने का फैसला कर लिया।
ये मेरी सच्ची सेक्स कहानी है जिसे मैं हमेशा छुपाना चाहता था, क्योंकि एक शादी के माहौल में अपनी एक्स के साथ ऐसा करना समाज की नज़र में गलत था। लेकिन ये मेरी ज़िंदगी का सबसे सच्चा किस्सा है। शादी में होटल में मिली एक्स गर्लफ्रेंड के साथ हुई हवस पूर्ति ने हमें एक नई शुरुआत दी। अब हम दोनों साथ हैं और पहले से भी ज़्यादा खुश हैं। कभी-कभी खोई हुई चीज़ें अनायास ही मिल जाती हैं और ज़िंदगी को एक नया मोड़ दे जाती हैं।
धन्यवाद…..

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